और राजू अपने शिक्षक से पूछता है ये लोग क्या कर रहे है तब राजू के शिक्षक राजू को बताते है राजू बेटा ये लोग मकान बना रहे है। फिर राजू ने पूछा क्या ये लोग खाना शाम को कहते है? शिक्षक ने कहा नहीं अब खाने का समय हो ही गया शायद अब खाएंगे ऐसे बाते करते करते राजू और उसके शिक्षक आगे बढे और राजू को एक थैली लटकी हुवी दिखी ता राजू दौड़ता हुवा उस थैली के पास गया और थैली को उठाकर देखने लगा।
उस थैली में कुछ रोटी प्याज़ और दो तीन मिर्च थी वो सब करते राजू के शिक्षक ने राजू को बोलै राजू ऐसी किसी की चीज को हाथ नहीं लगाते ये बुरी बात है। राजू बोलै में तो ऐसे ही देख रहा था सर राजू ने सोचा ये थैली शायद उन मजदूरों में से किसी एक की होगी, क्यों न इसे छुपा देता हु और जब ये थैली वाला मजदूर अपनी थैली ढूंढेगा तब देखने का मज़ा आएग। राजू ने ये बात अपने शिक्षक को बताई तब उसके शिक्षक ने राजू को कहा ऐसा राजू ऐसा नहीं करना चाहिए वो मजदूर इतनी महेनत करते है और हम ऐसे उनके साथ में ऐसा मजाक नहीं करना चाहिए। बल्कि उनकी हो सके तो उनकी मदद करनी चाहिए।
राजू अगर तुजे मजाक करनी है तो कुछ ऐसी करो जिस से उसको ख़ुशी मिले न के दुःख पहुंचे। ऐसे एहते ही शिक्षक ने उस थैली में 100 100 के 5 नॉट रख दिए और राजू से कहा अब चल हम छुपके देखते है और देखते है के वो मजदूर कैसे आश्चर्य में आता है। ऐसे कहते ही दोनों एक पेड़ इ पीछे छुप गए उतने में ही वो मजदूर खाना खाने आया और अपनी थैली लेके खाना खाने बैठता है और थैली में से खाने से पहले वो 100 100 की नॉट निकले। और वो मजदूर बहुत खुश हो गया और भगवन का सुक्रिया करने लगा और कहने लगा आज मुझे पैसो की बहुत जरूर थी आपने पैसा भेज दिया।
इन पैसो से में अपनी बीवी के लिए दवाइया ला सकता हु। और उसने वो पैसा ख़ुशी ख़ुशी अपनी जेब में रखके अपना खाना खाने लगा और खाना खाके वापस अपने काम पर चला गया।
और फिर राजू को उसका शिक्षक बोलता है देखा राजू अगर तूने उस मजदूर के साथ वो मजाक किया होता तो वो कितना परेशां होता और हमने उसकी थैली में पैसे रखे तो उसके चेहरे पर कितनी ख़ुशी दिखी राजू ने अपने शिक्षक से माफ़ी मांगी और बोला सॉरी सर आगे से में किसी के साथ ऐसा मजाक नहीं करूँगा और हो सके तो उसकी मदद करूँगा।